Thursday, November 9, 2017

योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ७: छटा दिन- सज्जनगढ़- ठोसेघर- सातारा


योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा १: असफलता से मिली सीख 
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा २: पहला दिन- चाकण से धायरी (पुणे) 
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ३: दूसरा दिन- धायरी (पुणे) से भोर 
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ४: तिसरा दिन- भोर- मांढरदेवी- वाई 
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ५: चौथा दिन- वाई- महाबळेश्वर- वाईयोग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ६: पाँचवा दिन- वाई- सातारा- सज्जनगढ़७: छटा दिन- सज्जनगढ़- ठोसेघर- सातारा
 



इस यात्रा का सम्बन्ध ध्यान- योग से किस प्रकार है, यह जानने के लिए यह पढ़िए|

३ अक्तूबर की सुबह| सज्जनगढ़ से सुबह का नजारा भी देखने लायक है| अच्छा विश्राम होने के कारण ताजगी महसूस कर रहा हूँ| सुबह साड़े छह बजे निकला, निकलते समय सज्जनगढ़ पर छोटा सा योगदान भी दिया| रात में तेज़ बारीश हुई है| मेरी साईकिल तो ठीक होगी ना?‌ साईकिल ठीक ही है| जल्दी से निकला| लेकीन नजारे ऐसे हैं कि बार बार फोटो खींचने के लिए रूक रहा हूँ| जल्द ही मुख्य सड़क पर पहुँचा| अब आज का पहला पड़ाव- ठोसेघर जलप्रपात यहाँ‌ से लगभग दस किलोमीटर पर है| लेकीन यह पूरा रास्ता चढाई का है| सड़क बहुत ही बढिया है और सुबह का विराना! ऐसी दूर तक चढाईभरी सड़क देख कर लदाख़ की याद आ रही है| इस चढाई से मुझे कुछ भी दिक्कत नही हो रही है| आराम से आगे जा रहा हूँ| चारों ओर नजारे ही नजारे!









Wednesday, November 1, 2017

योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ६: पाँचवा दिन- वाई- सातारा- सज्जनगढ़

योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा १: असफलता से मिली सीख 
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा २: पहला दिन- चाकण से धायरी (पुणे) 
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ३: दूसरा दिन- धायरी (पुणे) से भोर 
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ४: तिसरा दिन- भोर- मांढरदेवी- वाई 
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ५: चौथा दिन- वाई- महाबळेश्वर- वाई

पाँचवा दिन- वाई- सातारा- सज्जनगढ़
२ अक्तूबर. दो दिन वाई में ठहरने के बाद आज वाई से निकलना है| सुबह निकलने के पहले अन्धेरे में टहलने का आनन्द लिया! आज इस यात्रा का पाँचवा दिन! क्या यात्रा रही है यह! एक तरह से अब भी विश्वास नही हो रहा है कि मै कल सचमूच महाबळेश्वर गया था! आज देखा जाए तो आसान ही पड़ाव है| यहाँ से बत्तीस किलोमीटर पर सातारा शहर और उसके बाद पन्द्रह किलोमीटर पर सज्जनगढ़! कोई कठिनाई नही आनी चाहिए| लेकिन हम जो सोचते हैं, वैसा हर बार तो नही होता है!








Tuesday, October 24, 2017

योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ५: चौथा दिन- वाई- महाबळेश्वर- वाई

योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा १: असफलता से मिली सीख 
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा २: पहला दिन- चाकण से धायरी (पुणे) 
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ३: दूसरा दिन- धायरी (पुणे) से भोर
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ४: तिसरा दिन- भोर- मांढरदेवी- वाई

चौथा दिन- वाई- महाबळेश्वर- वाई
१ अक्तूबर की सुबह| नीन्द जल्दी खुल गई और उठने पर ताज़गी भी लगी| अच्छा विश्राम हुआ| कल तीसरा दिन होने के कारण शरीर अब इस रूटीन का आदी हो गया है| इसलिए नीन्द आसानी से लगी| सुबह पाँच बजे उठ कर तैयार हुआ| मेरा लॉज वाई बस स्टँड के ठीक सामने है| इसलिए सुबह भी अच्छी चहल- पहल है| बाहर चाय भी मिली| सुबह का सन्नाटा और अन्धेरा! हल्की सी ठण्ड, वाह! आसमान में जाने पहचाने मित्र- व्याध, मृग, रोहिणी, कृत्तिका! कुछ देर चाय का आनन्द लिया और फिर निकलने के लिए तैयार हुआ| लेकीन बाहर निकलने के पहले पाँच मिनिट फिर कंबल ओढ कर नीन्द का भी आनन्द लिया! आज मुझे कोई सामान साथ नही लेना है| सिर्फ पंक्चर का किट, पानी की बोतल और चॉकलेटस- बिस्किट आदि| इसलिए बिल्कुल फ्री हो कर जाऊँगा|

एक डर था की बारीश या कोहरा हो सकता है| लेकीन आसमान बहुत साफ है| सुबह छह बजे अच्छे से डबल प्लेट पोहे खाए और निकल पड़ा| महाबळेश्वर का रास्ता सामने से ही जाता है| आज इस पूरी यात्रा का सबसे अहम पड़ाव है| यहाँ से बारह किलोमीटर तक घाट है| एक तरह से इसी चरण पर पूरी यात्रा निर्भर करती है| अगर यहाँ मै साईकिल चला पाता हूँ, तो आगे भी दिक्कत नही आएगी| और अतीत की असफल यात्राओं का मलाल भी मिट जाएगा| इस तरह ये बारह किलोमीटर बहुत निर्णायक होंगे|  मेरे गाँव परभणी में दो कहावतें हैं| लोग कहते हैं, 'दुनिया में जर्मनी वैसे भारत में परभणी' और इसके साथ 'बनी तो बनी, नही तो परभणी!' भी कहते हैं! देखते हैं आज इनमें से क्या होता है| ये विचार मन में होने के बावजूद काफी हद तक मन शान्त है|














Monday, October 16, 2017

योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ४: तिसरा दिन- भोर- मांढरदेवी- वाई

योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा १: असफलता से मिली सीख 
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा २: पहला दिन- चाकण से धायरी (पुणे) 
योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ३: दूसरा दिन- धायरी (पुणे) से भोर
 

४: तिसरा दिन- भोर- मांढरदेवी- वाई

३० सितम्बर| रात अच्छी नीन्द हुई| सुबह नीन्द जल्द खुली| पास से ही निरा नदी बह रही है! शाम के समय पता नही चला, लेकीन अब उसकी गूँज सुनाई दे रही है! मेरे जल्द उठने कारण घर में सब जल्द उठ गए| आज दशहरे का दिन है! आज मेरी पहली परीक्षा होगी|‌ पहले लगा था कि कोहरा होने से थोड़ी देर से निकलना पड़ेगा| लेकीन समय पर सवा छह बजे निकल पाया| मित्र दत्ताभाऊ ने वाई में भी एक लॉज बताया है, आज वही ठहरूँगा| भाभीजी ने सुबह जल्दी उठ कर मेरे लिए नाश्ता बनाया| भूख़ तो नही है, फिर भी वह खा कर निकला| दोस्त के घर से निकला| साईकिल यात्रा के लिए आदर्श मौसम| बारीश रूक गई है, लेकीन माहौल बारीश जैसा है!

भोर गाँव से निकलते ही हल्की चढाई शुरू हुई| इसके साथ धीरे धीरे दूर दिखाई देनेवाले पहाड़ भी करीब आने लगे| मराठा इतिहास की दृष्टि से रोहिडेश्वर किला महत्त्वपूर्ण है| यहीं शिवाजी महाराज ने स्वराज्य स्थापना की शपथ ली थी! वही रोहीडेश्वर किले के करीब से यह सड़क जाएगी| मन में हल्का सा डर भी है| क्या यह पहला घाट मुझे पास करेगा? हल्की चढाई दस किलोमीटर तक है और घाट छह किलोमीटर का है| सड़क बहुत बढ़िया बनी है| बरसाती मौसम के बाद भी सड़क अच्छी है| छोटे छोटे गाँव लग रहे हैं| एक गाँव में दूर से एक गाना सुनाई दिया| गाना तो जाना पहचाना है, लेकीन सुनाई नही दे रहा है| पास जाने पर सुनाई दिया| इससे माहौल और भी आकर्षक बना| हर गाँव में नवरात्रि का त्यौहार मनाया जा रहा है|






रोहिडेश्वर का पहला दर्शन!




Saturday, October 14, 2017

योग ध्यान के लिए साईकिल यात्रा ३: दूसरा दिन- धायरी (पुणे) से भोर










: दूसरा दिन- धायरी (पुणे) से भोर

२९ सितम्बर| कल रात अच्छी नीन्द हुई| आज इस यात्रा का दूसरा दिन है और आज एक घाट भी पार करना है| हालांकी, अब टनेल होने के कारण यह घाट अब सिर्फ मामुली चढाई ही रह गया है| फिर भी शुरू में लगातार बारह किलोमीटर तक चढाई होगी, उसके बाद पच्चीस किलोमीटर तक उतराई और बाद में थोड़ी चढाई- उतराई रहेगी| आज से मेरे लिए बिल्कुल नया रास्ता शुरू हो जाएगा|

सुबह निकलते समय लगा था कि शायद कोहरे के कारण थोड़ा लेट निकलना पड़ेगा| लेकीन समय पर निकल गया| सामान बान्धने में थोड़ी दिक्कत हो रही है| उसे बार बार रूक कर ठीक करना पड़ा| सुबह इतने जल्दी मुझे मेरी एक दोस्त ने शुभकामनाएँ दी| ऐसी दोस्त जो मेरे लेखन के कारण मुझसे जुड़ी! जल्द ही टनेल के पहले की चढ़ाई शुरू हुई| याद आ रही हैं अतीत की कुछ राईडस जो मैने इस रोड़ पर की थी| सुबह की ताज़गी और ठण्ड में चढाई भी कुछ खास नही लगी| धीरे धीरे आगे बढ़ता गया| अब टनेल आएगा| उसके लिए एक जगह पर रूक कर ब्लिंकर शुरू कर लिया| लगभग डेढ किलोमीटर का यह टनेल है| इस टनेल के बाद माहौल बदल ही जाएगा| बड़ा फैला हुआ कॅनव्हास सामने आएगा और लम्बी उतराई भी शुरू होगी| इसी चढाई के बीच एक खूबसूरत झील दिखी जो अब धीरे धीरे शहर में खो जा रही है| शहर इसे निगल रहा है|



























जांभुळवाडी लेक या उसका बचा हुआ छोटासा हिस्सा!






























टनेल के पहले का दृश्य